ग्राम पंचायत शाहनगर (जिला पन्ना) में लाखों रुपए का फ्लेक्स–घोटाला!*
चीफ एडिटर -शैलेंद्र तिवारी
*ग्राम पंचायत शाहनगर (जिला पन्ना) में लाखों रुपए का फ्लेक्स–घोटाला!*
बिना GST वाले फर्जी बिल पर भुगतान, सरपंच–सचिव सीधे कटघरे में
ग्राम पंचायत शाहनगर, जिला पन्ना में सरकारी प्रचार-प्रसार के नाम पर फ्लेक्स, बैनर और होर्डिंग बनवाने में लाखों रुपये की बंदरबांट का सनसनीखेज मामला सामने आया है। उपलब्ध दस्तावेज़ स्पष्ट करते हैं कि बिना GST नंबर और कर विवरण वाले बिलों पर पंचायत निधि से भुगतान किया गया, जो सीधे-सीधे कानूनन अपराध है।
फर्जी बिल, फर्जी भुगतान
प्राप्त बिल में—
GSTIN अंकित नहीं
कर की कोई गणना नहीं
दरें बाज़ार मूल्य से 3–4 गुना अधिक
एक ही सामग्री को अलग-अलग मदों में दिखाकर राशि बढ़ाई गई
इसके बावजूद सरपंच और पंचायत सचिव ने जानबूझकर भुगतान स्वीकृत किया, जिससे यह मामला साधारण अनियमितता नहीं बल्कि सुनियोजित वित्तीय घोटाला बनता है।
लागू होती हैं ये गंभीर कानूनी धाराएं
भारतीय दंड संहिता (IPC)
धारा 420 – धोखाधड़ी कर सरकारी धन की हानि
धारा 409 – लोक सेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात
धारा 467 – मूल्यवान सुरक्षा/दस्तावेज़ की जालसाजी
धारा 468 – धोखाधड़ी के उद्देश्य से कूटरचना
धारा 471 – जाली दस्तावेज़ को असली बताकर उपयोग
धारा 120-B – आपराधिक षड्यंत्र
GST अधिनियम, 2017
धारा 122(1) – बिना पंजीकरण/फर्जी बिल से कर चोरी
धारा 132(1)(b)(c) – फर्जी इनवॉइस जारी कर/स्वीकार कर भुगतान
5 वर्ष तक की सज़ा व जुर्माने का प्रावधान
पंचायत राज एवं वित्त नियम
मध्यप्रदेश पंचायत वित्त एवं लेखा नियमों का घोर उल्लंघन
शासकीय धन के दुरुपयोग का स्पष्ट मामला
भुगतान कैसे हुआ? किसके आदेश से?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि—
बिना GST बिल ऑनलाइन सिस्टम में कैसे पास हुआ?
लेखा परीक्षण के बावजूद भुगतान कैसे निकला?
क्या इसमें तकनीकी सहायक/जनपद स्तर की मिलीभगत है?
*जांच नहीं हुई तो और बड़े खुलासे तय*
ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि इस प्रकरण की लोकायुक्त/ईओडब्ल्यू स्तर की जांच नहीं हुई, तो पंचायतों में चल रहे फर्जी बिलिंग–कमीशन सिंडिकेट के और भी मामले सामने लाए जाएंगे।
*ग्राम वासियों की मांग*
सरपंच व सचिव के विरुद्ध तत्काल FIR
पूरे भुगतान की रिकवरी
संबंधित फर्म को ब्लैकलिस्ट किया जाए
जनपद व जिला स्तर के अधिकारियों की भूमिका की जांच
यह मामला केवल फ्लेक्स का नहीं, बल्कि पंचायत तंत्र में बैठे भ्रष्ट तंत्र की जड़ों को उजागर करता है।

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