मई की चिलचिलाती धूप… आसमान से बरसती आग…फिर भी नहीं मिल रहा आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सहायिका को गर्मी में अवकाश।*
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chief editor -shailendra tiwari
मई की चिलचिलाती धूप… आसमान से बरसती आग…फिर भी नहीं मिल रहा आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सहायिका को गर्मी में अवकाश।
कटनी -हम आपको बता दें कि सूत्रों की जानकारी के अनुसार जहां आम जनजीवन तक प्रभावित है, वहीं एक बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है—क्या आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की सेहत और सम्मान की कोई कीमत नहीं?
भीषण गर्मी ने पूरे प्रदेश को अपनी चपेट में ले रखा है। तापमान 45 डिग्री के पार पहुंच रहा है, जहां लोगों को घरों से निकलना मुश्किल हो रहा है। ऐसे हालात में जहां एक ओर सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को गर्मी से राहत देते हुए अवकाश दिया गया है, वहीं दूसरी ओर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं मजबूरी में तपती धूप में अपनी सेवाएं देने को विवश हैं।
आंगनवाड़ी केंद्रों पर तैनात ये महिलाएं रोजाना बच्चों और गर्भवती महिलाओं की देखभाल, पोषण आहार वितरण और कई सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन करती हैं। लेकिन सवाल ये है कि इतनी जिम्मेदारियों के बावजूद उन्हें ना तो पर्याप्त वेतन मिलता है और ना ही मौसम की मार से कोई राहत।
*आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है।*
“हम लोग सुबह से दोपहर तक इस गर्मी में काम करते हैं… बच्चों और परिवार के लिए मजबूरी है, वरना इस हालत में बाहर निकलना मुश्किल है… सरकार से बस यही मांग है कि हमें भी राहत दी जाए…”
कम वेतन, ज्यादा काम और अब भीषण गर्मी में बिना किसी छुट्टी के ड्यूटी—ये हालात कहीं न कहीं इस वर्ग के साथ हो रहे असमान व्यवहार की ओर इशारा करते हैं।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मुद्दे पर क्या कदम उठाता है—क्या आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को भी इस भीषण गर्मी में राहत मिलेगी, या फिर यूं ही ये महिलाएं हालात से जूझती रहेंगी।

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