स्लॉट बुकिंग में खेल या किसानों के साथ अन्याय? कटनी के ढीमरखेड़ा में अन्नदाताओं का फूटा गुस्सा
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chief editor -shailendra tiwari
स्लॉट बुकिंग में खेल या किसानों के साथ अन्याय? कटनी के ढीमरखेड़ा में अन्नदाताओं का फूटा गुस्सा
कटनी- जिले के ढीमरखेड़ा खेड़ा क्षेत्र से किसानों की परेशानियों की एक बड़ी तस्वीर सामने निकलकर आ रही है, जहां एक ओर मध्यप्रदेश सरकार किसानों के हितों की बात करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर अन्नदाता व्यवस्था की मार झेलने को मजबूर दिखाई दे रहे हैं।किसानों का आरोप है कि उन्होंने समय रहते स्लॉट बुकिंग करवाई, लेकिन खरीदी की तारीख आने से दो दिन पहले ही स्लॉट बंद कर दिए गए। किसानों का कहना है कि पहले यदि किसी कारणवश स्लॉट समाप्त भी हो जाता था तो उसे दोबारा री-ओपन कर दिया जाता था, लेकिन इस वर्ष ऐसा नहीं किया गया, जिससे सैकड़ों किसानों के सामने भारी संकट खड़ा हो गया है।
इतना ही नहीं, किसानों ने खरीदी केंद्रों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि दो-दो बार झन्ना लगवाकर और साफ-सफाई कर अनाज लेकर आने के बावजूद ओपन कैंप में उनके अनाज को रिजेक्ट कर दिया जा रहा है। इससे किसानों को आर्थिक और मानसिक दोनों प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों का दर्द साफ झलकता है। उनका कहना है कि यदि समय पर अनाज की खरीदी नहीं होगी तो भुगतान अटक जाएगा, और भुगतान नहीं आने से बच्चों की शादी, खेती-किसानी और भविष्य की योजनाएं अधर में लटक जाएंगी।
वहीं किसानों ने एक और बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि ओपन कैंप के कुछ प्रभारी सात रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से पैसे लेने के बावजूद भी अनाज रिजेक्ट कर रहे हैं। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं तो यह न केवल किसानों के विश्वास के साथ छलावा होगा बल्कि सरकारी खरीदी व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा करेगा।
इस पूरे मामले को लेकर जब जिला प्रशासन के डीएम से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है और यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन किसानों की इन गंभीर शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेता है और अन्नदाताओं को राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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