“सामुदायिक भूमि पर रसूख का कब्जा! कैलवारा खुर्द में प्रशासनिक चुप्पी पर उठे सवाल*”
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chief editor -shailendra tiwari
सामुदायिक भूमि पर रसूख का कब्जा! कैलवारा खुर्द में प्रशासनिक चुप्पी पर उठे सवाल
खसरा नंबर 461 की जमीन पर अवैध निर्माण का आरोप, पंच की शिकायतों के बाद भी नहीं हुई कार्रवाईकटनी -जिले की ग्राम पंचायत कैलवारा खुर्द एक बार फिर सुर्खियों में है, जहां शासन द्वारा सामुदायिक भवन के लिए आरक्षित भूमि पर कथित अवैध कब्जे का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। मामला ग्राम पंचायत के यादव मोहल्ला स्थित खसरा क्रमांक 461 का है, जहां ग्रामीणों के अनुसार एक रसूखदार व्यक्ति द्वारा तेजी से निर्माण कार्य कराया जा रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह जमीन पूरे समाज के उपयोग के लिए सुरक्षित की गई थी, ताकि यहां सामुदायिक भवन का निर्माण हो सके और गांव के सामाजिक कार्यक्रम, विवाह एवं पंचायत संबंधी गतिविधियां संचालित हो सकें। लेकिन अब इस सार्वजनिक भूमि पर निजी कब्जा किए जाने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
सबसे बड़ी बात यह है कि वार्ड पंच सरोज राजपाल द्वारा इस मामले की लिखित शिकायत तहसीलदार, एसडीएम कार्यालय, कलेक्टर कार्यालय और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 तक की जा चुकी है। बावजूद इसके अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
इस वार्ड के पंच का कहना है। कि यदि यही अतिक्रमण किसी गरीब व्यक्ति द्वारा किया गया होता, तो प्रशासन तत्काल बुलडोजर कार्रवाई कर देता। लेकिन यहां मामला कथित तौर पर एक प्रभावशाली और आर्थिक रूप से मजबूत व्यक्ति से जुड़ा होने के कारण जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे हुए हैं।
गांव में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर शिकायतों के बावजूद जांच क्यों लंबित है? क्या जनसुनवाई और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन जैसी व्यवस्थाएं केवल कागजों तक सीमित रह गई हैं?
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर सामुदायिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए, ताकि गांव की सार्वजनिक संपत्ति सुरक्षित रह सके।
अब बड़ा सवाल यही है कि जिला प्रशासन जनहित में सख्त कदम उठाएगा या फिर रसूख और धनबल के आगे यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।


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