गरीबों की जमा पूंजी पर डाका?* *निवार SBI ग्राहक सेवा केंद्र में करोड़ों की हेराफेरी की आशंका, पिपरौंध कियोस्क सेंटर जांच के घेरे में!**
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गरीबों की जमा पूंजी पर डाका?*
*निवार SBI ग्राहक सेवा केंद्र में करोड़ों की हेराफेरी की आशंका, पिपरौंध कियोस्क सेंटर जांच के घेरे में!
कटनी जिले के निवार क्षेत्र से बैंकिंग व्यवस्था को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। पिपरौंध स्थित SBI ग्राहक सेवा केंद्र में बड़े वित्तीय घोटाले की आशंका ने उपभोक्ताओं में हड़कंप मचा दिया है। कियोस्क सेंटर संचालिका पलक जैन अब सवालों के घेरे में हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से खातों में गड़बड़ी, रकम कटौती और लेन-देन में हेराफेरी का खेल चल रहा था, लेकिन शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीण इलाकों में बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाने के लिए खोले गए ग्राहक सेवा केंद्र अब खुद संदेह के घेरे में नजर आ रहे हैं। पिपरौंध स्थित SBI कियोस्क सेंटर पर उपभोक्ताओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं।
कई ग्राहकों का कहना है कि उनके खातों से रकम निकल गई लेकिन उन्हें पूरी राशि नहीं दी गई। वहीं कुछ लोगों ने बिना जानकारी पैसे कटने और खाते का बैलेंस कम होने की शिकायत की है।
ग्राहकों का आरोप है कि जब उन्होंने जानकारी मांगनी चाही तो उन्हें गोलमोल जवाब देकर टाल दिया गया।
स्थानीय लोगों के मुताबिक यह मामला अचानक सामने नहीं आया, बल्कि लंबे समय से केंद्र में अनियमितताओं की चर्चा होती रही है। लेकिन अब जब कई उपभोक्ता खुलकर सामने आए हैं, तो पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।
सूत्रों की मानें तो कुछ पीड़ित उपभोक्ताओं ने बैंक अधिकारियों और प्रशासन से लिखित शिकायत भी की है। इसके बाद अब पूरे मामले की जांच की मांग तेज हो गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि ग्राहक सेवा केंद्रों में इस तरह की हेराफेरी होती रही तो लोगों का बैंकिंग व्यवस्था से भरोसा उठ जाएगा। गरीब और मजदूर वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है, क्योंकि वही इन केंद्रों पर निर्भर रहते हैं।
अब क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और जिन उपभोक्ताओं के पैसे फंसे हैं उन्हें जल्द राहत दिलाई जाए।
पिपरौंध स्थित SBI ग्राहक सेवा केंद्र पर उठे सवाल अब बैंकिंग व्यवस्था की पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रहे हैं। अब निगाहें बैंक प्रशासन और जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि आखिर कब तक पीड़ित उपभोक्ताओं को न्याय मिल पाएगा।

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