सरपंच पर सनसनीखेज आरोप: घर में घुसकर चाकू की नोक पर अभद्रता, न्याय के लिए मां-बेटी पहुंचीं एसपी कार्यालय" थानों से नहीं मिली सुनवाई, अब पुलिस अधीक्षक से लगाई न्याय की गुहार

fast News 9 

chief editor -shailendra tiwari 

 सरपंच पर सनसनीखेज आरोप: घर में घुसकर चाकू की नोक पर अभद्रता, न्याय के लिए मां-बेटी पहुंचीं एसपी कार्यालय

थानों से नहीं मिली सुनवाई, अब पुलिस अधीक्षक से लगाई न्याय की गुहार


कटनी। जिले के बड़वारा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पौड़ी में एक महिला द्वारा ग्राम पंचायत पठरा के वर्तमान सरपंच पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पीड़िता का कहना है कि आरोपी सरपंच ने उसके घर में घुसकर चाकू की नोक पर उसके साथ अभद्रता की और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी। मामले में स्थानीय थाना और महिला थाना से कार्रवाई न होने का आरोप लगाते हुए पीड़िता अपनी वृद्ध मां के साथ एसपी कार्यालय कटनी पहुंची और न्याय की गुहार लगाई।

अकेलेपन का फायदा उठाने का आरोप

पीड़िता रननो सिंह गौड़ के अनुसार, घटना के समय वह घर पर अकेली थी। उसके पति और मां किसी काम से बाहर गए हुए थे। इसी दौरान ग्राम पंचायत पठरा के सरपंच अशोक सिंह गौड़ कथित तौर पर उसके घर में जबरन घुस आए।

पीड़िता का आरोप है कि आरोपी ने चाकू दिखाकर उसे डराया-धमकाया और उसके साथ आपत्तिजनक हरकतें कीं। महिला का कहना है कि जब उसने विरोध करने और शोर मचाने की कोशिश की तो आरोपी ने उसे जान से मारने की धमकी दी।

थानों के चक्कर, लेकिन नहीं मिली राहत

घटना के बाद पीड़िता न्याय की उम्मीद लेकर बड़वारा थाना पहुंची। उसका आरोप है कि वहां उसकी शिकायत पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया और उसे डांटकर वापस भेज दिया गया।

इसके बाद वह अपनी मां के साथ महिला थाना भी पहुंची, लेकिन वहां भी उसकी शिकायत दर्ज नहीं की गई। लगातार निराशा मिलने के बाद दोनों ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से न्याय की मांग करने का निर्णय लिया।

एसपी कार्यालय पहुंचीं मां-बेटी

अब पीड़िता अपनी वृद्ध मां के साथ पुलिस अधीक्षक कार्यालय कटनी पहुंची है। दोनों ने अधिकारियों को आवेदन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच, शिकायत दर्ज करने और आरोपी सरपंच के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

मां-बेटी का कहना है कि उन्हें प्रशासन और पुलिस से न्याय की उम्मीद है और दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

उठ रहे कई सवाल

क्या प्रभावशाली पद पर बैठे व्यक्ति के कारण शुरुआती स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई?

यदि शिकायत की गई थी तो उसे दर्ज क्यों नहीं किया गया?

क्या वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद पीड़िता को न्याय मिल पाएगा?

क्या पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाएगी?

फिलहाल मामला पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक पहुंच चुका है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और पीड़ित मां-बेटी को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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