विकास के नाम पर खेल या भ्रष्टाचार का नाला? बाकल में नाली निर्माण ने खड़े किए बड़े सवाल

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chief editor -shailendra tiwari 

विकास के नाम पर खेल या भ्रष्टाचार का नाला? बाकल में नाली निर्माण ने खड़े किए बड़े सवाल


कटनी जिले के बहोरीबंद क्षेत्र की ग्राम पंचायत बाकल में विकास कार्यों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जिस नाली से गांव की जल निकासी व्यवस्था सुधरनी थी, वही नाली अब भ्रष्टाचार और गुणवत्ता पर उठ रहे सवालों के कारण चर्चा का केंद्र बन गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी धन से हो रहे निर्माण में मानकों को ताक पर रखकर मलबा और बड़े-बड़े पत्थर भर दिए गए हैं।

*विकास या विनाश की तैयारी?*

ग्राम पंचायत बाकल में लोक निर्माण विभाग की देखरेख में नाली और सड़क निर्माण कार्य कराया जा रहा है। लेकिन निर्माण कार्य शुरू होने के साथ ही ग्रामीणों ने इसकी गुणवत्ता पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। आरोप है कि नाली निर्माण में सीमेंट-कंक्रीट के बजाय बड़े-बड़े पत्थरों और मलबे का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे निर्माण की मजबूती पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

*सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों ने बढ़ाई हलचल*

ग्रामीणों द्वारा साझा किए गए फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन तस्वीरों में कथित रूप से नाली के भीतर बड़े पत्थर और निर्माण मलबा दिखाई देने के दावे किए जा रहे हैं। वायरल तस्वीरों के बाद गांव में चर्चाओं का बाजार गर्म है और लोग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। *तकनीकी निगरानी पर भी उठे सवाल*

ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण स्थल पर न तो कोई तकनीकी अधिकारी नियमित रूप से मौजूद रहता है और न ही किसी इंजीनियर की प्रभावी निगरानी दिखाई दे रही है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि आखिर निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जिम्मेदारी कौन ले रहा है?

*कल की समस्या बन सकता है आज का निर्माण*

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नाली के भीतर मलबा और बड़े पत्थर भरकर निर्माण किया गया है, तो भविष्य में उसकी सफाई करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। बरसात के दिनों में नाली जाम होने से जलभराव की स्थिति बन सकती है, जिससे आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

 *पहले भी उठ चुके हैं सवाल*

ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में पूर्व में हुए कुछ निर्माण कार्यों को लेकर भी अनियमितताओं के आरोप लग चुके हैं। हालांकि उन मामलों में कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई। यही वजह है कि इस बार लोग चाहते हैं कि जांच केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई भी हो।

: *विधायक और सरपंच की चुप्पी क्यों?*

गांव में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की भी है कि मामले को लेकर अब तक स्थानीय विधायक और ग्राम पंचायत के जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ग्रामीणों का कहना है कि जनता के हित से जुड़े इस मुद्दे पर जनप्रतिनिधियों को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

 *PWD विभाग की कार्यप्रणाली कटघरे में*

जानकारी के अनुसार निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग की निगरानी में कराया जा रहा है। ऐसे में ग्रामीणों का सवाल है कि यदि निर्माण में गुणवत्ता से समझौता हो रहा है तो विभाग के जिम्मेदार अधिकारी क्या कर रहे हैं? क्या विभागीय निगरानी केवल कागजों तक सीमित है या वास्तव में मौके पर भी गुणवत्ता की जांच की जा रही है?

"बाकल में उठे ये सवाल सिर्फ एक नाली निर्माण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सरकारी विकास कार्यों की पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़े हैं। अब निगाहें जिला प्रशासन, जनपद पंचायत और लोक निर्माण विभाग पर टिकी हैं। क्या होगी तकनीकी जांच? क्या सामने आएगी सच्चाई? और क्या दोषियों पर होगी कार्रवाई? इन सभी सवालों के जवाब का इंतजार पूरे गांव को है।"

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