अतिक्रमण पर नगर निगम का ‘एक्शन’ या सिर्फ दिखावा? 2-3 बार पहुंचा दस्ता, फिर भी 5 फीट सड़क निगल गई किराना दुकान!
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chief editor -shailendra tiwari
अतिक्रमण पर नगर निगम का ‘एक्शन’ या सिर्फ दिखावा? 2-3 बार पहुंचा दस्ता, फिर भी 5 फीट सड़क निगल गई किराना दुकान!
ACC कॉलोनी मार्ग पर सड़क निर्माण में अड़ंगा, शिकायतों के बाद भी नहीं हटा कथित अतिक्रमण
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 तक पहुंची शिकायत, मौके पर पहुंचा दस्ता और समझाइश देकर लौट गया—अब उठ रहे संरक्षण के सवाल
कटनी। शहर में अतिक्रमण हटाने को लेकर नगर निगम की कार्रवाई एक बार फिर सवालों के घेरे में है। माधवनगर थाना क्षेत्र के संजय नगर स्थित जाकिर हुसैन वार्ड में ACC कॉलोनी मार्ग से संजय नगर कॉम्प्लेक्स होते हुए तालाब की ओर जाने वाले मार्ग पर एक किराना दुकान के सड़क की ओर करीब 5 फीट तक बढ़े होने का आरोप सामने आया है। स्थानीय नागरिकों का दावा है कि कथित अतिक्रमण के चलते सड़क निर्माण कार्य प्रभावित हो रहा है, लेकिन शिकायतों के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है।
शिकायत पर शिकायत, कार्रवाई फिर भी गायब!
क्षेत्रवासियों के अनुसार सड़क की सीमा में कथित अतिक्रमण को लेकर नगर निगम सहित संबंधित विभागों में कई बार शिकायत की गई। मामला मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 तक भी पहुंचाया गया, ताकि सड़क की सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जा सके। बावजूद इसके शिकायतकर्ताओं का कहना है कि स्थिति आज भी जस की तस बनी हुई है।
दस्ता पहुंचा... देखा... समझाया और लौट गया!
सबसे बड़ा सवाल यह है कि नगर निगम का अतिक्रमण दस्ता कथित तौर पर दो से तीन बार मौके पर पहुंच चुका है, लेकिन हर बार कार्रवाई के बजाय समझाइश देकर वापस लौटने की बात सामने आ रही है। ऐसे में अब स्थानीय नागरिक सवाल उठा रहे हैं कि आखिर ऐसी कौन-सी मजबूरी या वजह है कि मौके पर पहुंचने के बाद भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं की जा रही?
सड़क निर्माण अंतिम चरण में, अतिक्रमण बना रोड़ा
क्षेत्रवासियों का कहना है कि सड़क निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है। यदि सड़क की निर्धारित सीमा में मौजूद कथित अतिक्रमण को समय रहते नहीं हटाया गया तो सड़क की चौड़ाई प्रभावित हो सकती है। भविष्य में इससे वाहनों की आवाजाही और यातायात व्यवस्था पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
संरक्षण किसका?’—अब यही बन गया बड़ा सवाल
स्थानीय नागरिकों के बीच अब चर्चा का विषय यह है कि जब शिकायतें हो चुकी हैं, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तक मामला पहुंच चुका है और नगर निगम का अमला कई बार मौके पर पहुंच चुका है, तो फिर कथित अतिक्रमण जस का तस क्क् अतिक्रमण हटाने के नियम सबके लिए समान हैं या फिर किसी खास व्यक्ति को कार्रवाई से राहत मिल रही है? यदि अतिक्रमण सरकारी सड़क की सीमा में है तो उसे हटाने में देरी क्यों? और यदि दुकान वैध सीमा में है तो संबंधित विभाग स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करता?
नागरिकों ने की निष्पक्ष जांच और तत्काल कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ताओं डने नगर निगम एवं जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही सड़क की सीमा की नाप-जोख कर स्थिति स्पष्ट करने और यदि सरकारी भूमि पर अतिक्रमण पाया जाता है तो उसे तत्काल हटाने की मांग की गई है।
अब देखना यह होगा कि नगर निगम प्रशासन इस मामले में कागजी कार्रवाई से आगे बढ़कर जमीन पर कार्रवाई करता है या फिर अतिक्रमण का यह मामला भी शिकायतों और समझाइश के बीच ही दबकर रह जाता है।
नोट: यह समाचार स्थानीय नागरिकों एवं शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। संबंधित दुकानदार एवं नगर निगम प्रशासन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी समाचार में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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