10 साल से फाइलों में दबा था प्रमुख सचिव का आदेश!अनुपम गृह निर्माण समिति जमीन मामले में बड़ा खुलासा, जांच और कार्रवाई के निर्देश के बावजूद क्यों नहीं हुई कार्रवाई?
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chief editor -shailendra tiwari
10 साल से फाइलों में दबा था प्रमुख सचिव का आदेश!अनुपम गृह निर्माण समिति जमीन मामले में बड़ा खुलासा, जांच और कार्रवाई के निर्देश के बावजूद क्यों नहीं हुई कार्रवाई?
कटनी -अनुपम गृह निर्माण सहकारी समिति से जुड़े बहुचर्चित जमीन विवाद में एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब एक दशक पुराने प्रशासनिक पत्र और उसमें दिए गए निर्देश सामने आने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है।
जानकारी के मुताबिक, तत्कालीन राजस्व प्रमुख सचिव राघव चंद्रा द्वारा अनुपम गृह निर्माण समिति से जुड़े जमीन आवंटन, नामांतरण और अन्य मामलों की जांच को लेकर कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। आरोप है कि वरिष्ठ स्तर से निर्देश जारी होने के बावजूद संबंधित प्रकरण वर्षों तक प्रशासनिक फाइलों में दबा रहा।
क्या है पूरा मामला?
अनुपम गृह निर्माण सहकारी समिति के सदस्यों के भूखंडों के आवंटन, नामांतरण और जमीन के हस्तांतरण को लेकर लंबे समय से शिकायतें सामने आती रही हैं। शिकायतकर्ताओं की ओर से आरोप लगाए गए कि कुछ भूखंडों के दस्तावेजों और लेन-देन में अनियमितताएं हुईं तथा जमीनों के हस्तांतरण में नियमों का पालन नहीं किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन प्रमुख सचिव स्तर से जांच और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई है।
10 साल तक आदेश पर क्यों नहीं हुई कार्रवाई?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि वरिष्ठ अधिकारी स्तर से जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे, तो आखिर इतने वर्षों तक प्रकरण आगे क्यों नहीं बढ़ा?
क्या संबंधित फाइलों क्या पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई?
क्या इस दौरान विवादित भूखंडों का दोबारा हस्तांतरण या अन्य किसी प्रकार का लेन-देन हुआ?
और यदि दस्तावेजों में अनियमितता पाई गई थी, तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
पीड़ितों को अब न्याय की उम्मीद
वर्षों से अपने भूखंड और जमा-पूंजी को लेकर परेशान सदस्यों ने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई है। शिकायतकर्ताओं की मांग है कि पुराने आदेश और उससे संबंधित पूरी फाइल की जांच कर यह पता लगाया जाए कि कार्रवाई में देरी किन कारणों से हुई।
पीड़ित पक्ष की ओर से EOW अथवा विशेष जांच दल (SIT) जैसी एजेंसी से जांच कराने तथा यदि किसी अधिकारी, समिति पदाधिकारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की मांग की जा रही है।

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