सरकारी आवास में प्राइवेट क्लिनिक का आरोप!जिला अस्पताल कटनी में ‘सरकारी सुविधा, निजी कमाई’ का खेल?
fast News 9
chief editor -shailendra tiwari
सरकारी आवास में प्राइवेट क्लिनिक का आरोप!जिला अस्पताल कटनी में ‘सरकारी सुविधा, निजी कमाई’ का खेल?
कटनी। जिला अस्पताल परिसर में सरकारी आवास के कथित तौर पर निजी क्लिनिक के रूप में इस्तेमाल किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर आरती सौंधिया द्वारा सरकारी आवास में मरीजों को निजी तौर पर देखने और उनसे परामर्श शुल्क लेने का काम किया जा रहा है।
सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जिला अस्पताल आने वाले कुछ मरीजों को सरकारी आवास तक ले जाया जाता है, जहां कथित रूप से उनका परीक्षण कर ₹300 तक परामर्श शुल्क लिया जाता है।
सरकारी परिसर में ब्लड सैंपल लेने का भी आरोप
मामला सिर्फ परामर्श शुल्क तक सीमित होने के आरोप नहीं हैं। सूत्रों का दावा है कि मरीजों के ब्लड सैंपल भी सरकारी आवास में लिए जाते हैं, जिन्हें कथित तौर पर निजी लैब अथवा सिमी हॉस्पिटल में जांच के लिए भेजा जाता है।
यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह सरकारी आवास और सरकारी संसाधनों के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
रोजाना ₹10 हजार की कमाई का दावा
सूत्रों द्वारा इस कथित निजी क्लिनिक से प्रतिदिन करीब ₹10 हजार की आय होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इस आय के दावे और मरीजों से ली जाने वाली फीस की वास्तविकता की पुष्टि संबंधित विभागीय जांच के बाद ही हो सकेगी।
सवाल सीधा है—
आवास सरकारी...
बिजली-पानी सरकारी...
परिसर सरकारी...
तो फिर मरीजों से वसूली जाने वाली फीस किस नियम के तहत?
CMHO कार्यालय की नाक के नीचे आखिर कैसे?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिला अस्पताल परिसर और CMHO कार्यालय से कुछ ही दूरी पर यदि इस तरह की गतिविधि संचालित होने का आरोप है, तो स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई?
क्या सरकारी आवास का इस्तेमाल निजी क्लिनिक के लिए किया जा सकता है?
क्या सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों को निजी जांच के लिए भेजने की अनुमति है?
और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी?
जांच के बाद ही होगा दूध का दूध, पानी का पानी
फिलहाल सामने आए आरोपों की स्वतंत्र एवं विभागीय पुष्टि होना बाकी है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सरकारी आवास में वास्तव में निजी क्लिनिक संचालित हो रहा था या नहीं, मरीजों से शुल्क लिया जा रहा था या नहीं और सरकारी संसाधनों का किसी निजी गतिविधि में इस्तेमाल हुआ या नहीं।
अब नजरें जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की जांच एवं कार्रवाई पर टिकी हैं।
सरकारी आवास में निजी क्लिनिक के इन आरोपों पर क्या होगी कार्रवाई?
क्या खुलेगा पूरा राज, या फिर मामला फाइलों में ही दब जाएगा?

Comments
Post a Comment