बिखरे पत्रकारों की आवाज नहीं बन सकती ताकत, एकजुटता ही अधिकारों की संजीवनी: जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया देशभर के प्रदेश पदाधिकारियों की वर्चुअल बैठक में पत्रकारों के अधिकारों, शोषण और संगठनात्मक एकजुटता पर ढाई घंटे मंथन

 fast News 9 

chief editor -shailendra tiwari 

बिखरे पत्रकारों की आवाज नहीं बन सकती ताकत, एकजुटता ही अधिकारों की संजीवनी:

जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया,देशभर के प्रदेश पदाधिकारियों की वर्चुअल बैठक में पत्रकारों के अधिकारों, शोषण और संगठनात्मक एकजुटता पर ढाई घंटे मंथन

कटनी -नई दिल्लीजर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया (रजि.) की वर्चुअल मासिक बैठक में देशभर के विभिन्न प्रदेशों के पदाधिकारियों ने सहभागिता की। करीब ढाई घंटे चली इस बैठक में पत्रकारिता के वर्तमान दौर, पत्रकारों के अधिकारों, उनके सामने आ रही चुनौतियों तथा संगठनात्मक एकजुटता को लेकर गंभीर चर्चा की गई। बैठक में वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ प्रदेश स्तर के प्रतिनिधियों ने भी अपने अनुभव और सुझाव साझा किए।

बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पत्रकारों की एकजुटता को प्रमुख विषय बनाते हुए कहा कि पत्रकारिता आज विषम परिस्थितियों से गुजर रही है। उन्होंने कहा कि कई बार जो पत्रकार अपना दायित्व निभाते हुए खबर सामने लाता है, वही परिस्थितियों में सवालों के घेरे में आ जाता है। पत्रकारों के सामने आर्थिक और व्यावसायिक चुनौतियां भी लगातार बढ़ रही हैं।

उन्होंने कहा कि पत्रकारिता मूल रूप से जनसेवा का माध्यम है, लेकिन देश के विभिन्न हिस्सों से पत्रकारों के शोषण और उनके अधिकारों से जुड़े मामले सामने आते रहते हैं। ऐसे समय में पत्रकारों का संगठित होना बेहद आवश्यक है।

पत्रकारों की वास्तविक संख्या तक का स्पष्ट आंकड़ा नहीं

बैठक में एक महत्वपूर्ण मुद्दा देश में पत्रकारों की वास्तविक संख्या और उनकी स्थिति से जुड़ा रहा। वक्ताओं ने कहा कि सरकार के पास विभिन्न वर्गों से संबंधित अनेक आंकड़े उपलब्ध हैं, लेकिन देश में कुल कितने पत्रकार कार्यरत हैं, उनकी कार्य परिस्थितियां क्या हैं और कितने पत्रकार किन समस्याओं से जूझ रहे हैं—इसका कोई स्पष्ट और सर्वमान्य आंकड़ा सामने नहीं है।

वक्ताओं के अनुसार इसका एक बड़ा कारण पत्रकारों का विभिन्न स्तरों पर बिखरा होना है। जब पत्रकार अलग-अलग रहते हैं तो उनकी सामूहिक आवाज कमजोर पड़ती है और उनके अधिकारों से जुड़े मुद्दे प्रभावी ढंग से सामने नहीं आ पाते।

‘हर पत्रकार अपने आप में विशेष, लेकिन संगठन ही सामूहिक ताकत’

बैठक में अध्यक्षीय संबोधन के दौरान पत्रकारों की एकजुटता को समझाने के लिए उदाहरण देते हुए कहा गया कि हर मोती अपने आप में कीमती होता है, लेकिन जब वही मोती एक धागे में पिरोकर माला बनते हैं तो उनकी सामूहिक शक्ति और महत्व बढ़ जाता है।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक पत्रकार अपनी खबर, न्यूज प्रेजेंटेशन और कवरेज को बेहतर बनाने के लिए पूरी मेहनत करता है। पत्रकार अपने व्यक्तिगत कार्यक्षेत्र में उत्कृष्टता दिखाने का प्रयास करता है, लेकिन यही भावना संगठनात्मक एकजुटता में भी दिखाई देनी चाहिए।

‘अब आवाज बुलंद करने के लिए एकजुट होना होगा’

राष्ट्रीय संयोजक ने भी बैठक में अपने विचार रखते हुए पत्रकारों की समस्याओं और संगठनात्मक मजबूती पर चर्चा की। वहीं विभिन्न प्रदेशों के पदाधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों के अनुभव साझा करते हुए पत्रकारों को एकजुट करने और उनके अधिकारों से जुड़े विषयों को संगठित रूप से उठाने पर जोर दिया।

बैठक में यह बात प्रमुखता से सामने आई कि पत्रकारों के अधिकारों और समस्याओं को लेकर केवल व्यक्तिगत स्तर पर आवाज उठाने के बजाय सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। वक्ताओं ने कहा कि एकजुटता पत्रकारों की ताकत बन सकती है और उनके अधिकारों की लड़ाई को नई दिशा दे सकती है।

वरिष्ठजनों और प्रदेश पदाधिकारियों की सहभागिता से बैठक रही सार्थक

देशभर से वरिष्ठजनों और प्रदेश पदाधिकारियों की सहभागिता के बीच हुई यह वर्चुअल मासिक बैठक करीब ढाई घंटे तक चली। बैठक में पत्रकारिता से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ और संगठन को मजबूत बनाने की दिशा में सुझाव रखे गए।

अंत में प्रतिभागियों ने वरिष्ठ पदाधिकारियों और प्रदेश प्रतिनिधियों की सहभागिता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए पत्रकारों के हितों एवं अधिकारों के लिए संगठनात्मक एकजुटता को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

Comments

Popular posts from this blog

मई की चिलचिलाती धूप… आसमान से बरसती आग…फिर भी नहीं मिल रहा आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सहायिका को गर्मी में अवकाश।*

प्रधानमंत्री आवास योजना में नाम जोड़ने के नाम पर अवैध वसूली का आरोप! कटनी में जिला पंचायत सीईओ से जांच और कार्रवाई की मांग

कटनी बस स्टैंड पर मिली अज्ञात व्यक्ति की लाश, यात्रियों में मचा हड़कंप, पुलिस ने संभाला मोर्चा*