मझगवां ओपन कैप वेयरहाउस में लाखों बोरा धान खराब होने का दावा निकला भ्रामक? ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आई अलग
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chief editor -shailendra tiwari
मझगवां ओपन कैप वेयरहाउस में लाखों बोरा धान खराब होने का दावा निकला भ्रामक? ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आई अलग
14 सितंबर की शाम जनता की आवाज न्यूज़ चैनल की टीम ने किया मौके का निरीक्षण, इंचार्ज ने बताया—सिर्फ 4-5 बोरों तक पहुंचा था पानी, स्थिति नियंत्रण मेंकटनी। मझगवां स्थित ओपन कैप वेयरहाउस में लाखों बोरा धान खराब होने, अनाज के अंकुरित होने और सड़ने को लेकर सामने आ रही खबरों के बीच जनता की आवाज न्यूज़ चैनल की टीम ने 14 सितंबर 2026 की शाम करीब 5 बजे मौके पर पहुंचकर पूरे मामले की ग्राउंड रिपोर्टिंग की।
मीडिया में दिखाई जा रही तस्वीरों और दावों की जमीनी हकीकत जानने के लिए टीम ने वेयरहाउस परिसर का मौके पर निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान बड़े पैमाने पर धान खराब होने या लाखों बोरों में अनाज सड़ने जैसी स्थिति नजर नहीं आई। मौके पर अनाज का रख-रखाव व्यवस्थित और सुरक्षित पाया गया।
बारिश को लेकर वेयरहाउस इंचार्ज ने क्या बताया?
मौके पर मौजूद वेयरहाउस इंचार्ज से जब टीम ने सीधे बातचीत की तो उन्होंने बताया कि लगातार करीब 7-8 दिनों तक धूप नहीं निकलने के कारण तिरपाल/कवर के कुछ घुमावदार हिस्सों से मामूली पानी कुछ स्टैक तक पहुंच गया था।
इंचार्ज के अनुसार, पानी की वजह से केवल 4-5 बोरों का अनाज प्रभावित हुआ और अंकुरित हुआ था, जिसे समय रहते संभाल लिया गया।
इंचार्ज ने यह भी दावा किया कि कुछ लोगों द्वारा सीमित मात्रा में हुई इस सामान्य स्थिति को बढ़ा-चढ़ाकर लाखों बोरा धान खराब होने की बात के रूप में प्रचारित किया गया, जिससे जनता के बीच भ्रम की स्थिति बनी।
जांच की बात पर इंचार्ज का दो टूक जवाब
मामले में किसी भी उच्च अधिकारी द्वारा जांच किए जाने के सवाल पर वेयरहाउस इंचार्ज ने स्पष्ट कहा कि यदि अधिकारी मौके पर जांच के लिए आते हैं तो उनके सामने भी यही वास्तविक स्थिति और तथ्य रखे जाएंगे।
ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आई तस्वीर
14 सितंबर की शाम करीब 5 बजे जनता की आवाज न्यूज़ चैनल की टीम द्वारा किए गए ऑन-स्पॉट निरीक्षण के दौरान बड़े पैमाने पर धान की बर्बादी जैसी स्थिति दिखाई नहीं दी। वहीं, इंचार्ज द्वारा भी सीमित मात्रा में पानी पहुंचने और कुछ बोरों के प्रभावित होने की बात कही गई।
हालांकि, किसी भी तरह के नुकसान की वास्तविक मात्रा और भंडारित धान की स्थिति का अंतिम आकलन संबंधित विभाग की आधिकारिक जांच और रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगा।

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