RTI की जानकारी मांगने पहुंचे पत्रकारों का वीडियो बनाने पर सवाल!MPWLC कार्यालय में आउटसोर्स कर्मचारी ने बिना बताए बनाई पत्रकारों की वीडियो, पत्रकारों ने जताई आपत्ति और सुरक्षा को लेकर आशंका

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chief editor -shailendra tiwari 

RTI की जानकारी मांगने पहुंचे पत्रकारों का वीडियो बनाने पर सवाल!MPWLC कार्यालय में आउटसोर्स कर्मचारी ने बिना बताए बनाई पत्रकारों की वीडियो, पत्रकारों ने जताई आपत्ति और सुरक्षा को लेकर आशंका

कटनी। मध्यप्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉरपोरेशन (MPWLC) से संबंधित जानकारी आरटीआई के माध्यम से प्राप्त करने के लिए चार पत्रकार संबंधित विभाग के कार्यालय पहुंचे। पत्रकारों के अनुसार उन्होंने विभाग के प्रमुख प्रबंधक योगेंद्र सिंह सेंगर के समक्ष आरटीआई आवेदन प्रस्तुत कर उसकी विधिवत रिसीविंग मांगी।

इसी दौरान कार्यालय में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारी नीरज दुबे कथित तौर पर बिना किसी पूर्व बातचीत के पत्रकारों का वीडियो बनाने लगे। पत्रकारों ने जब उनसे वीडियो बनाए जाने का कारण पूछा तो उनके द्वारा कथित रूप से कहा गया कि “आप लोगों की फोटो की अति आवश्यक जरूरत है, बाद में आप लोगों को खुद ही जानकारी मिल जाएगी।”

इस घटनाक्रम को लेकर मौके पर मौजूद पत्रकारों ने सवाल उठाया कि जब वे संबंधित विभाग से आरटीआई के माध्यम से जानकारी लेने के लिए नियमानुसार आवेदन देने पहुंचे थे, तो उनकी वीडियो किस उद्देश्य से बनाई जा रही थी।

पत्रकारों का कहना है कि आरटीआई के तहत जानकारी मांगना नागरिकों और पत्रकारों का वैधानिक अधिकार है और आवेदन की रिसीविंग लेना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। ऐसे में आवेदन देने पहुंचे पत्रकारों की वीडियो बनाए जाने से उनके मन में किसी अप्रिय घटना की आशंका उत्पन्न हुई।

पत्रकारों ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में इस घटनाक्रम के बाद किसी पत्रकार के साथ किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना घटती है, तो आउटसोर्स कर्मचारी नीरज दुबे द्वारा वीडियो बनाए जाने तथा कार्यालय स्तर पर इस घटनाक्रम की जिम्मेदारी को लेकर संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा।

मामले में पत्रकारों ने विभागीय अधिकारियों से स्पष्ट करने की मांग की है कि पत्रकारों का वीडियो किस उद्देश्य से बनाया गया, वीडियो किसके निर्देश पर बनाया गया और उसका इस्तेमाल किस प्रयोजन के लिए किया जाना है।

अब सवाल यह है कि आरटीआई के तहत विभागीय जानकारी मांगने पहुंचे पत्रकारों की वीडियो बनाने की आवश्यकता आखिर क्यों पड़ी? यदि यह विभागीय प्रक्रिया का हिस्सा था, तो इसकी स्पष्ट जानकारी पत्रकारों को मौके पर क्यों नहीं दी गई?

फिलहाल पूरे मामले को लेकर पत्रकारों में नाराजगी है और संबंधित विभाग से स्पष्ट जवाब एवं पारदर्शिता की मांग की जा रही है।

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