पत्रकारों की सुरक्षा, पेंशन और आवास पर आर-पार की आवाज! महेंद्र सोनी गुड्डू ने उठाया पत्रकारों के हक का मुद्दा, मुख्यमंत्री से 11 सूत्रीय मांगों पर निर्णय लेने की मांग
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chief editor -shailendra tiwari
पत्रकारों की सुरक्षा, पेंशन और आवास पर आर-पार की आवाज!
महेंद्र सोनी गुड्डू ने उठाया पत्रकारों के हक का मुद्दा, मुख्यमंत्री से 11 सूत्रीय मांगों पर निर्णय लेने की मांग
कटनी, मध्यप्रदेश। पत्रकार लोकतंत्र की आवाज हैं, लेकिन जब उसी आवाज की सुरक्षा, सम्मान, पेंशन और आवास का सवाल उठता है, तो आखिर सरकार कब तक मौन रहेगी? पत्रकारों की इन्हीं समस्याओं को लेकर द जर्नलिस्ट एसोसिएशन (पत्रकार संगठन), जिला कटनी के अध्यक्ष महेंद्र सोनी गुड्डू ने पत्रकारों के हित में आवाज बुलंद की है।
पत्रकार सुरक्षा कानून, ₹15 हजार मासिक पेंशन, रियायती आवास, ₹10 लाख तक कैशलेस स्वास्थ्य बीमा और शासकीय विज्ञापन नीति सहित 11 सूत्रीय मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिए जाने की मुहिम का उन्होंने पूर्ण समर्थन किया है।
पत्रकार सवाल पूछे तो जवाब मिले, दबाव नहीं!
महेंद्र सोनी गुड्डू का कहना है कि गांव-कस्बों से लेकर शहरों तक पत्रकार अपनी कलम, कैमरे और मोबाइल के माध्यम से भ्रष्टाचार, जनसमस्याओं और प्रशासनिक खामियों को सामने लाते हैं। लेकिन जब पत्रकारों की सुरक्षा, आर्थिक स्थिति और भविष्य की बात आती है, तो उन्हें अपनी जायज मांगों के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पत्रकारों की ये मांगें किसी एक संगठन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन सभी पत्रकारों के हितों से जुड़ी हैं, जो जनहित में निष्पक्ष पत्रकारिता करते हैं।
क्या हैं पत्रकारों की 11 प्रमुख मांगें?
1. पत्रकार सुरक्षा कानून: पत्रकारों पर हमलों की रोकथाम के लिए प्रभावी कानून लागू किया जाए और शिकायतों पर निष्पक्ष एवं समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित हो।
2. ₹15 हजार मासिक पेंशन: 60 वर्ष की आयु पूरी करने वाले पात्र सक्रिय पत्रकारों को न्यूनतम ₹15 हजार मासिक पेंशन मिले। 15 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले पत्रकारों को भी पात्रता का लाभ दिया जाए तथा मृत्यु के बाद पत्नी को पारिवारिक पेंशन मिले।
3. पत्रकार आवास योजना: प्रत्येक जिले में पत्रकारों को रियायती दर पर भूखंड और आवास उपलब्ध कराने के लिए योजना बनाई जाए।
4. अधिमान्यता प्रक्रिया सरल हो: ग्रामीण और डिजिटल पत्रकारों के लिए पारदर्शी, ऑनलाइन और समयबद्ध अधिमान्यता व्यवस्था लागू की जाए।
5. कैशलेस स्वास्थ्य बीमा: पत्रकारों को ₹10 लाख तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा, ओपीडी सुविधा सहित उपलब्ध कराया जाए तथा पात्र पत्रकारों को स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ मिले।
6. आर्थिक सहायता एवं श्रद्धा निधि: दुर्घटना या असमय मृत्यु की स्थिति में ₹5 लाख से ₹10 लाख तक आर्थिक सहायता देने की व्यवस्था हो। कल्याण कोष की बढ़ी हुई राशि का लाभ सभी जिलों में समान रूप से मिले।
7. न्यायसंगत विज्ञापन नीति: छोटे समाचार पत्रों, डिजिटल न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनलों को निर्धारित पारदर्शी मानकों के तहत शासकीय विज्ञापन का अवसर दिया जाए।
8. यात्रा एवं टोल में छूट: पत्रकारों के लिए बसों में सीट आरक्षण, रेलवे में पूर्ववत छूट बहाल करने और टोल शुल्क में छूट देने की मांग की गई है।
9. पत्रकार भवन एवं प्रेस क्लब: प्रत्येक जिला मुख्यालय पर पत्रकार भवन बनाया जाए, जहां बैठने, इंटरनेट और बैठकों की समुचित व्यवस्था हो।
10. शिकायत निवारण समिति सक्रिय हो: पत्रकारों की समस्याओं के निराकरण के लिए कल्याण एवं शिकायत निवारण समिति प्रभावी ढंग से काम करे और शिकायतों का 30 दिनों के भीतर निराकरण सुनिश्चित किया जाए।
11. समग्र पत्रकार कल्याण नीति: राजस्थान और हरियाणा की व्यवस्थाओं से सीख लेते हुए मध्यप्रदेश में भी ऐसी व्यापक नीति बनाई जाए, जिसमें डिजिटल पत्रकारों के हितों और मान्यता से जुड़े प्रावधान शामिल हों।
कन्हवारा के मामले का जिक्र, पत्रकारों की सुरक्षा पर उठाए सवाल
महेंद्र सोनी गुड्डू ने कन्हवारा स्थित ग्लोबल वर्ल्ड पब्लिक स्कूल से संबंधित खबर का उल्लेख करते हुए कहा कि खबर उठाने के बाद पत्रकार को 10 सवालों का पर्चा दिए जाने का मामला पत्रकारिता के सामने आने वाली चुनौतियों पर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने इस प्रकरण को पत्रकारों के कामकाज और उनकी सुरक्षा से जुड़े व्यापक सवालों के संदर्भ में उठाया और कहा कि जनहित के मुद्दों को सामने लाने वाले पत्रकारों को भयमुक्त वातावरण मिलना चाहिए।
मुख्यमंत्री से दो टूक मांग—पत्रकारों को सुरक्षा और सम्मान कब?
महेंद्र सोनी गुड्डू ने कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान, आर्थिक स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा को सरकार प्राथमिकता दे। पत्रकारों की समस्याओं का समाधान केवल आश्वासनों से नहीं, बल्कि ठोस नीतिगत निर्णयों से होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पत्रकारों की मांगें कोई भीख नहीं, बल्कि सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य-परिस्थितियों की मांग हैं।
द जर्नलिस्ट एसोसिएशन, जिला कटनी ने स्पष्ट किया है कि संगठन पत्रकारों के अधिकारों और हितों की आवाज उठाता रहेगा। मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं होने की स्थिति में जिले से लेकर प्रदेश स्तर तक आवाज बुलंद करने की बात भी कही गई है।
अब बड़ा सवाल यह है कि जनहित की आवाज उठाने वाले पत्रकारों की सुरक्षा, पेंशन और आवास के लिए सरकार ठोस कदम कब उठाएगी?

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