MPWLC कटनी में ‘घटती’ से लेकर बेनामी संपत्तियों तक सवाल! जिला प्रबंधक से लेकर आउटसोर्स कर्मियों तक की संपत्ति जांच की मांग, EOW-लोकायुक्त जांच की उठी आवाज
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chief editor -shailendra tiwari
MPWLC कटनी में ‘घटती’ से लेकर बेनामी संपत्तियों तक सवाल!
जिला प्रबंधक से लेकर आउटसोर्स कर्मियों तक की संपत्ति जांच की मांग, EOW-लोकायुक्त जांच की उठी आवाज
कटनी। मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉरपोरेशन यानी MPWLC कटनी एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। धान भंडारण में सामने आए घटती और गबन के मामलों के बीच अब कॉरपोरेशन के अधिकारियों के साथ-साथ आउटसोर्स और अधीनस्थ कर्मचारियों की कथित तौर पर तेजी से बढ़ी संपत्ति को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।
आखिर कुछ वर्षों में इतनी संपत्ति कैसे?
सबसे बड़ा सवाल उन आउटसोर्स कर्मचारियों को लेकर उठाया जा रहा है, जिनका वेतन सीमित बताया जाता है। आरोप है कि पिछले 3 से 5 वर्षों में कुछ कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति में कथित रूप से असामान्य बदलाव देखने को मिला है।
महंगी गाड़ियां, जमीन-जायदाद और अन्य संपत्तियों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं कि आखिर इन संपत्तियों का स्रोत क्या है?
क्या इनकी आय और संपत्ति का कोई मेल है?
यही सवाल अब जांच की मांग को और तेज कर रहा है।
धान की ‘घटती’ में किसकी भूमिका?
कटनी जिले के विभिन्न वेयरहाउसों में धान की कमी और गबन के प्रकरण सामने आने की बात कही जा रही है। आरोप यह भी हैं कि कई मामलों में धान की घटती का पूरा भार वेयरहाउस संचालकों पर डाल दिया गया, जबकि शिकायतकर्ताओं द्वारा कॉरपोरेशन के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की संभावित भूमिका की भी जांच की मांग की जा रही है।
हालांकि इन आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
वेयरहाउस संचालकों के साथ हुआ छल या सिस्टम की खामी?
वेयरहाउसों में खाद्यान्न के रखरखाव, स्टॉक सत्यापन और घटती से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की मांग उठ रही है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए और स्टॉक रिकॉर्ड से लेकर अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका तक की जांच हो, तो कथित गड़बड़ियों की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।
5 साल के कार्यकाल की जांच की मांग
शिकायत में MPWLC कटनी के जिला प्रबंधक योगेंद्र सिंह सेंगर के करीब 5 वर्षों के कार्यकाल के दौरान हुए कामकाज की जांच की मांग किए जाने की बात सामने आई है।
साथ ही इस अवधि में पदस्थ रहे अधीनस्थ एवं आउटसोर्स कर्मचारियों की चल-अचल संपत्ति, आय के स्रोत और वित्तीय लेन-देन की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की जा रही है।
EOW या लोकायुक्त जांच से खुलेगा राज?
अब सवाल सिर्फ धान की घटती तक सीमित नहीं है।
सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की संपत्ति उनकी वैध आय के अनुरूप है?
क्या वेयरहाउसों में हुई कथित अनियमितताओं और कर्मचारियों की संपत्ति में हुए इजाफे के बीच कोई संबंध है?
इन तमाम सवालों का जवाब सिर्फ निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है।
शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच EOW या लोकायुक्त जैसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए, ताकि आरोपों की सच्चाई सामने आए और यदि किसी स्तर पर भ्रष्टाचार या आय से अधिक संपत्ति का मामला पाया जाता है तो जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।
अब देखना होगा कि गंभीर आरोपों और जांच की मांग के बाद MPWLC प्रबंधन और जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।

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